DSSSB TGT CS Mock 02 – Question 096

Question:

निर्देश (प्रश्न 16 – 20): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए:

साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, अपितु उसका पथ-प्रदर्शक भी है। जिस समाज का साहित्य जितना समृद्ध, उन्नत और लोक-कल्याणकारी होता है, वह समाज भी उतना ही सुसंस्कृत और प्रगतिशील बनता है। साहित्यकार समाज के सुख-दुख, आशा-निराशा, संघर्ष और आकांक्षाओं को अपनी वाणी प्रदान करता है। वह मात्र यथार्थ का चित्रण नहीं करता, बल्कि समाज को एक आदर्श दिशा की ओर उन्मुख करने का प्रयास करता है। कबीर, तुलसी, सूरदास और प्रेमचंद जैसे कालजयी रचनाकारों ने अपने युग की कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता, प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया। अतः समाज को यदि जागृत और सचेत रखना है, तो साहित्य का संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।

गद्यांश के अनुसार साहित्य समाज के लिए किस रूप में कार्य करता है?

निर्देश (प्रश्न 16 – 20): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए:

साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, अपितु उसका पथ-प्रदर्शक भी है। जिस समाज का साहित्य जितना समृद्ध, उन्नत और लोक-कल्याणकारी होता है, वह समाज भी उतना ही सुसंस्कृत और प्रगतिशील बनता है। साहित्यकार समाज के सुख-दुख, आशा-निराशा, संघर्ष और आकांक्षाओं को अपनी वाणी प्रदान करता है। वह मात्र यथार्थ का चित्रण नहीं करता, बल्कि समाज को एक आदर्श दिशा की ओर उन्मुख करने का प्रयास करता है। कबीर, तुलसी, सूरदास और प्रेमचंद जैसे कालजयी रचनाकारों ने अपने युग की कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता, प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया। अतः समाज को यदि जागृत और सचेत रखना है, तो साहित्य का संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।

गद्यांश के अनुसार साहित्य समाज के लिए किस रूप में कार्य करता है?

Options:

  • दर्पण और पथ-प्रदर्शक दोनों
  • केवल मनोरंजन का साधन
  • केवल आर्थिक साधन
  • केवल यथार्थ का चित्र
  • दर्पण और पथ-प्रदर्शक दोनों
  • केवल मनोरंजन का साधन
  • केवल आर्थिक साधन
  • केवल यथार्थ का चित्र

Correct Answer: a)

Explanation:

गद्यांश की प्रथम पंक्ति के अनुसार: ‘साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, अपितु उसका पथ-प्रदर्शक भी है’ (Option a)।

गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि साहित्य समाज का दर्पण और पथ-प्रदर्शक दोनों है (विकल्प a)।

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