Question:
निर्देश (प्रश्न 16 – 20): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए:
साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, अपितु उसका पथ-प्रदर्शक भी है। जिस समाज का साहित्य जितना समृद्ध, उन्नत और लोक-कल्याणकारी होता है, वह समाज भी उतना ही सुसंस्कृत और प्रगतिशील बनता है। साहित्यकार समाज के सुख-दुख, आशा-निराशा, संघर्ष और आकांक्षाओं को अपनी वाणी प्रदान करता है। वह मात्र यथार्थ का चित्रण नहीं करता, बल्कि समाज को एक आदर्श दिशा की ओर उन्मुख करने का प्रयास करता है। कबीर, तुलसी, सूरदास और प्रेमचंद जैसे कालजयी रचनाकारों ने अपने युग की कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता, प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया। अतः समाज को यदि जागृत और सचेत रखना है, तो साहित्य का संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।
साहित्यकार अपनी रचनाओं में किसका चित्रण और प्रयास करता है?
निर्देश (प्रश्न 16 – 20): निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्न का उत्तर दीजिए:
साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, अपितु उसका पथ-प्रदर्शक भी है। जिस समाज का साहित्य जितना समृद्ध, उन्नत और लोक-कल्याणकारी होता है, वह समाज भी उतना ही सुसंस्कृत और प्रगतिशील बनता है। साहित्यकार समाज के सुख-दुख, आशा-निराशा, संघर्ष और आकांक्षाओं को अपनी वाणी प्रदान करता है। वह मात्र यथार्थ का चित्रण नहीं करता, बल्कि समाज को एक आदर्श दिशा की ओर उन्मुख करने का प्रयास करता है। कबीर, तुलसी, सूरदास और प्रेमचंद जैसे कालजयी रचनाकारों ने अपने युग की कुरीतियों पर प्रहार करते हुए मानवता, प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया। अतः समाज को यदि जागृत और सचेत रखना है, तो साहित्य का संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।
साहित्यकार अपनी रचनाओं में किसका चित्रण और प्रयास करता है?
Options:
- युग की कुरीतियों, विषमताओं और संकीर्णताओं पर
- प्राकृतिक सौंदर्य पर
- धार्मिक सहिष्णुता पर
- वैज्ञानिक प्रगति पर
- युग की कुरीतियों, विषमताओं और संकीर्णताओं पर
- प्राकृतिक सौंदर्य पर
- धार्मिक सहिष्णुता पर
- वैज्ञानिक प्रगति पर
Correct Answer: a)
Explanation:
गद्यांश में उल्लिखित है कि इन रचनाकारों ने अपने युग की कुरीतियों, विषमताओं और संकीर्णताओं पर तीखा प्रहार किया (Option a)।
गद्यांश के अनुसार कालजयी रचनाकारों ने अपने समय की कुरीतियों और संकीर्णताओं पर प्रहार किया (विकल्प a)।