Question:
दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दें:
मनुष्य उत्सव प्रिय होते हैं। उत्सव का एकमात्र उद्देश्य आनंद प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की पूर्ति होने पर सभी को सुख होता है पर उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमें किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत क्षणिक होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यह आनंद जीवन का आनंद है, काम का नहीं| उस दिन हम अपनी सारी आवश्यकताओं को भूल कर केवल मनुष्यत्व का ख्याल करते हैं। उस दिन हम अपनी स्वार्थ-चिंता छोड़ देते हैं, कर्तव्य-भार की उपेक्षा कर देते हैं तथा गौरव और सम्मान को भूल जाते हैं। उस दिन हममें उच्छृंखलता आ जाती है, स्वच्छंदता आ जाती है। उस रोज हमारी दिनचर्या बिल्कुल नष्ट हो जाती है। व्यर्थ घूम कर, व्यर्थ काम कर, व्यर्थ खा-पीकर हम लोग अपने मन में अनुभव करते हैं कि हम सच्चा आनंद पा रहे हैं।
निम्नलिखित में से किस वाक्य में ‘क्षणिक’ शब्द का उचित प्रयोग किया गया है?
दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दें:
मनुष्य उत्सव प्रिय होते हैं। उत्सव का एकमात्र उद्देश्य आनंद प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की पूर्ति होने पर सभी को सुख होता है पर उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमें किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत क्षणिक होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यह आनंद जीवन का आनंद है, काम का नहीं| उस दिन हम अपनी सारी आवश्यकताओं को भूल कर केवल मनुष्यत्व का ख्याल करते हैं। उस दिन हम अपनी स्वार्थ-चिंता छोड़ देते हैं, कर्तव्य-भार की उपेक्षा कर देते हैं तथा गौरव और सम्मान को भूल जाते हैं। उस दिन हममें उच्छृंखलता आ जाती है, स्वच्छंदता आ जाती है। उस रोज हमारी दिनचर्या बिल्कुल नष्ट हो जाती है। व्यर्थ घूम कर, व्यर्थ काम कर, व्यर्थ खा-पीकर हम लोग अपने मन में अनुभव करते हैं कि हम सच्चा आनंद पा रहे हैं।
निम्नलिखित में से किस वाक्य में ‘क्षणिक’ शब्द का उचित प्रयोग किया गया है?
Options:
- अपनी क्षणिक भूख के लिए तुमने सारी रोटियाँ खा लीं !
- मेरे घर बहुत से क्षणिक अतिथि आये हैं।
- यह विपत्ति तो क्षणिक है, चली जायेगी।
- आज हमारे समाज में क्षणिक उत्सव है।
- अपनी क्षणिक भूख के लिए तुमने सारी रोटियाँ खा लीं !
- मेरे घर बहुत से क्षणिक अतिथि आये हैं।
- यह विपत्ति तो क्षणिक है, चली जायेगी।
- आज हमारे समाज में क्षणिक उत्सव है।
Correct Answer: c)
Explanation:
‘क्षणिक’ means momentary, transient, or short-lived. In sentence 3: ‘यह विपत्ति तो क्षणिक है, चली जायेगी।’ (This distress is momentary, it will pass), ‘क्षणिक’ is used in an authentic and semantically appropriate manner. In the other sentences, qualifying ‘भूख’, ‘अतिथि’, or ‘उत्सव’ with ‘क्षणिक’ is awkward and contextually inappropriate.
‘क्षणिक’ का अर्थ होता है – जो बहुत कम समय या क्षण भर के लिए रहे (अल्पकालिक)। वाक्य ‘यह विपत्ति तो क्षणिक है, चली जायेगी।’ में ‘क्षणिक’ शब्द का सर्वथा शुद्ध और सार्थक प्रयोग हुआ है। अन्य विकल्पों में ‘क्षणिक भूख’, ‘क्षणिक अतिथि’ या ‘क्षणिक उत्सव’ का प्रयोग असंगत है।