DSSSB TGT CS 2023 Shift 2 – Question 100

Question:

दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दें:

मनुष्य उत्सव प्रिय होते हैं। उत्सव का एकमात्र उद्देश्य आनंद प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की पूर्ति होने पर सभी को सुख होता है पर उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमें किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत क्षणिक होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यह आनंद जीवन का आनंद है, काम का नहीं| उस दिन हम अपनी सारी आवश्यकताओं को भूल कर केवल मनुष्यत्व का ख्याल करते हैं। उस दिन हम अपनी स्वार्थ-चिंता छोड़ देते हैं, कर्तव्य-भार की उपेक्षा कर देते हैं तथा गौरव और सम्मान को भूल जाते हैं। उस दिन हममें उच्छृंखलता आ जाती है, स्वच्छंदता आ जाती है। उस रोज हमारी दिनचर्या बिल्कुल नष्ट हो जाती है। व्यर्थ घूम कर, व्यर्थ काम कर, व्यर्थ खा-पीकर हम लोग अपने मन में अनुभव करते हैं कि हम सच्चा आनंद पा रहे हैं।


गद्यांश में जीवन का कौन-सा गहन तथ्य छुपा हुआ है?

दिए गए गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दें:

मनुष्य उत्सव प्रिय होते हैं। उत्सव का एकमात्र उद्देश्य आनंद प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की पूर्ति होने पर सभी को सुख होता है पर उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है। आवश्यकता अभाव सूचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हमें किसी बात की कमी है। मनुष्य-जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत क्षणिक होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यह आनंद जीवन का आनंद है, काम का नहीं| उस दिन हम अपनी सारी आवश्यकताओं को भूल कर केवल मनुष्यत्व का ख्याल करते हैं। उस दिन हम अपनी स्वार्थ-चिंता छोड़ देते हैं, कर्तव्य-भार की उपेक्षा कर देते हैं तथा गौरव और सम्मान को भूल जाते हैं। उस दिन हममें उच्छृंखलता आ जाती है, स्वच्छंदता आ जाती है। उस रोज हमारी दिनचर्या बिल्कुल नष्ट हो जाती है। व्यर्थ घूम कर, व्यर्थ काम कर, व्यर्थ खा-पीकर हम लोग अपने मन में अनुभव करते हैं कि हम सच्चा आनंद पा रहे हैं।


गद्यांश में जीवन का कौन-सा गहन तथ्य छुपा हुआ है?

Options:

  • उत्सव में किसी अभाव का अनुभव न होने से विशुद्ध आनंद की प्राप्ति होती है और हम सही अर्थों में चिन्ता-मुक्त और स्वच्छंद होकर, कुछ समय के लिए, जीवन का रसास्वादन कर पाते हैं, किन्तु यह आनंद वास्तविक और स्थायी होता है मन को नयी शक्ति देता है।
  • उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते जिससे सब अभाव ख़त्म हो जाते हैं।
  • मनुष्य-जीवन ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई आवश्यकता नहीं रह गई है इसीलिए आवश्यकता की पूर्ति होने पर उसे सुख होता है।
  • मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है, किन्तु सुख की प्राप्ति नहीं कर पाता। आवश्यकताओं की पूर्ति और आनंद का एकमात्र साधन उत्सव हैं।
  • उत्सव में किसी अभाव का अनुभव न होने से विशुद्ध आनंद की प्राप्ति होती है और हम सही अर्थों में चिन्ता-मुक्त और स्वच्छंद होकर, कुछ समय के लिए, जीवन का रसास्वादन कर पाते हैं, किन्तु यह आनंद वास्तविक और स्थायी होता है मन को नयी शक्ति देता है।
  • उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते जिससे सब अभाव ख़त्म हो जाते हैं।
  • मनुष्य-जीवन ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई आवश्यकता नहीं रह गई है इसीलिए आवश्यकता की पूर्ति होने पर उसे सुख होता है।
  • मनुष्य अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है, किन्तु सुख की प्राप्ति नहीं कर पाता। आवश्यकताओं की पूर्ति और आनंद का एकमात्र साधन उत्सव हैं।

Correct Answer: a)

Explanation:

The profound truth conveyed by the author is that ordinary pleasures derived from fulfilling needs are temporary because human needs never end; however, during festivals, by feeling no sense of deprivation or obligation, humans experience pure, unadulterated joy. This allows us to relish life freely and without worry, rejuvenating the mind and spirit. Thus, Option 1 is the correct statement.

गद्यांश में लेखक ने यह गहन दार्शनिक तथ्य उजागर किया है कि आवश्यकताओं की पूर्ति से मिलने वाला सुख क्षणिक होता है क्योंकि मनुष्य की आवश्यकताएं कभी समाप्त नहीं होतीं। इसके विपरीत, उत्सव में किसी अभाव का अनुभव न होने से विशुद्ध व वास्तविक आनंद मिलता है और व्यक्ति चिंता-मुक्त होकर जीवन का रसास्वादन करता है, जिससे मन को नई स्फूर्ति और शक्ति मिलती है। अतः विकल्प 1 सही उत्तर है।

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